आखिर क्यों करते हें हजारो युवा हनुमान बेनीवाल का समर्थन

बहुत सारे लोग पूछते है हनुमान बेनीवाल तुम्हे क्या देता है तुम उनके कट्टर समर्थक क्यों हो या बेनीवाल का ही समर्थन क्यों करते हो और भी बड़े नेता है उनका क्यों नही? 

तो सुन लीजिए मैं हनुमान बेनीवाल का समर्थन करता हु मैं उस शख्सियत का समर्थन करता हूँ जिससे पुरे राजस्थान को उम्मीद है, मैं उस शख्सियत का समर्थन करता हु जो एक नेता होकर भी नेता नही है। जिसका दिल इस राजस्थान की जनता के लिए धड़कता है। मैं उस शेर का समर्थन करता हु जो हर विधवा महिला का सरंक्षक है, हर अनाथ का पिता है हर असहाय व्यक्ति का सहारा है। अरे मैं उस शख्सियत का समर्थन करता हु जो इस राजस्थान की आवाज है। हर गरीब की उम्मीद है मैं उस शख्सियत का समर्थक हु जो 24×7 जनता की सेवा के लिए तत्पर रहता है।  कही दुर्घटना होती है तो उसके परिवार के पहुचने से पहले वो पहुच जाता है। इस प्रचण्ड गर्मी में जब नेता AC में गहननिद्रा में होते है तब वह आम जनता के बीच होता है, उनकी समस्या सुलझाता है, उनकी हर सम्भव मदद करता है। मैं उस शख्सियत का समर्थक हु जो आरक्षण की लड़ाई में हुकूमत को झुकने पर मजबूर कर देता है। जिसके एक इशारे पर राजस्थान का सम्पूर्ण 36 कौम जयपुर की सड़कों पर उतर जाता है। मैं उस शख्सियत का समर्थक हु जो बोलता है तो उसकी वाणी में इस बदकिस्मत जनता का दर्द छलकता है दोस्तों हमे जलन उसी से होती है जो हमसे बेहतर होता है तो एक शख्सियत ऐसी भी है जो राजस्थान के हर भ्रष्ट नेता के गले की हड्डी की है हर भ्रष्ट अधिकारी जिसके नाम से सकते में आ जाता है, जो इस जनता की लड़ाई में कई बार जैल की हवा खाकर भी संघर्षशील रहता है। मैं उस व्यक्ति का समर्थक हु। अब ये सारी खूबिया बेनीवाल साहब में है इसका तो में क्या कर सकता हु।
कल बामनवास में एक सज्जन से मेरी मुलाकात हुई मेरे मोबाइल की होम स्क्रीन में बेनीवाल साहब का वॉलपेपर सेट था जो शायद उन्हें दिख गया था उन्होंने मुझसे पूंछा भाई तुम जाट  हो?  मेने कहा कि में जाट हु पर आपको कैसे पता चला तो उन्होंने बताया कि आप के मोबाइल में बेनीवाल साहब की फोटो देखकर उन्होंने ये अनुमान लगाया है, फिर उन्होंने बताया कि वह तेजा जी  के विचारों  के पृति है मेरी भावना जागृत हुई। उन्होंने एक बात कही जो मेरे दिल को छू गई “तुम्हारा जाट समाज आपसी खींचतान की वजह से ही आज गर्त में जा रहा है पता नही हनुमान बेनीवाल नही होगा तब जाट समाज का क्या होगा ? इतनी विपरीत परिस्थिति के बावजूद वह शेर एक पर्वत की भांति खड़ा है अगर कोई और होता तो कब का ढेर हो चूका होता” उन्होंने ने कहा कि मैं जाट नही हु फिर भी हनुमान बेनीवाल  को अपना नेता मानता हूं हनुमान बेनीवाल केवल जाट  ही नही इस राजस्थान के सर्व समाज के नेता है हर शोषित वर्ग के नेता है, दुसरे वर्गो में बेनीवाल साहब का इतना सम्मान है पर उसके अपने समाज के लोग उसके समर्थको को चमचा कहने से नही चूकते चलिये भाई चमचे ही सही पर गद्दार तो नही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *