महारानी की नींद उड़ाने के लिए सीकर जायेंगे हनुमान बेनीवाल व किरोड़ी लाल मीणा

प्रदेश के सीकर जिले में गत 10 दिनों से किसानों की कर्ज माफी व स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग को लेकर चल रहे किसान आन्दोलन को गति देने के लिए 10 सितम्बर को खिवंसर विधायक हनुमान बेनीवाल व लालसोट विधायक किरोड़ी लाल मीणा भी सीकर किसान आन्दोलन में शीरकत करेंगे। विधायक बेनीवाल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बताया की वह 10 सितम्बर को नागौर आवास से  जायल, डीडवाना, लोसव खूड होते हुए दोपहर करीब 12 बजे  सीकर पहुचेंगे।

सीकर किसान आन्दोलन 
सीकर किसान आन्दोलन

 

ये कहा हनुमान बेनीवाल 

विधायक बेनीवाल ने शुक्रवार को अपने नागौर आवास से प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बताया की सीकर व बीकानेर संभाग सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे किसान आन्दोलन का वह समर्थन करते हैं। विधायक बेनिवाल ने बताया की प्रदेश के सीकर जिले में पिछले 10 दिनों से चल रहे किसान आन्दोलन में किसानो ने जगह जगह महापड़ाव डाल रखा है। बेनीवाल ने कहा की कोमरेड अमरा राम जी के नेत्र्तव  में चल रहे किसान आन्दोलन को समर्थन देने के लिए वह स्वयं और लालसोट विधायक किरोड़ी लाल जी मीणा सीकर किसान आन्दोलन में भाग लेंगे। साथ ही विधायक बेनिवाल ने राज्य सरकार की आड़े हाथों लेते हुए कहा की सीकर में पिछले 10 दिनों से प्रदेश का अन्नदाता सड़क पर महापड़ाव डाले हुए संघर्ष कर रहा हैं, लेकिन प्रदेश की सरकार उनकी और कोई ध्यान नहीं दे रही हैं। विधायक बेनिवाल ने कहा की केंद्र सरकार ने पिछले 15 वर्षो में धना सेठो का 1 लाख करोड़ का कर्जा माफ कर दिया तो राजस्थान के किसान का 82 हजार करोड़ का कर्जा भी तुरंत प्रभाव से माफ़ कर प्रदेश में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू  करनी चाहिए । जिससे किसान की आर्थिक स्थिती ठीक हो सके।

ये हे सीकर के हालात 

कर्ज माफी सहित स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग को लेकर सीकर जिले के किसान पिछले दस दिनों से महापड़ाव डाले हुए हैं। महापड़ाव के सातवे दिन बंद के आयोजन के तहत सीकर जिला पूरी तरह से बंद रहा। बंद के दौरान आम लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। जिला मुख्यालय ही नहीं बल्कि छोटे-मोटे गांवों कस्बों में भी बंद का व्यापक असर देखा गया। हालांकि बंद शांतिपूर्ण रहा, लेकिन फिर भी प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था। जिला मुख्यालय पर बंद को अभूतपूर्व समर्थन मिला और शहर के बाजार पूरी तरह सूने रहे। हालाँकि किसान आन्दोलन को लेकर किसानो व प्रशासन के बीच वार्ता भी हुई लेकिन वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुची।



 

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