Political Carrer

Political Carrer Of Hanuman Beniwal

हनुमान जी बेनीवाल का राजनैतिक सफर :-

 

  • 1994 मे राजस्थान कॉलेज के अध्यक्ष बने

  • 1995 मे दुबारा राजस्थान कॉलेज के अध्यक्ष बने ।

  • 1996 मे राजस्थान विधि कॉलेज के अध्यक्ष बने ।

  • 1997मे राजस्थान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बने ।

  • 2003 मे मुंडवा विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मे चुनाव लड़ा मगर 2000 वोटों से हार गए ।

  • 2008 मे बीजेपी के टिकट पर नवगठित खींवसर विधानसभा से चुनाव लड़ा और नागौर जिले की सभी सीटो मे सबसे बड़ी जीत ।

  • 2010 में भाजपा की विधायक दल की बैठक में  किसान व जवान के मान – सम्मान के लिए भारतीय जनता पार्टी को ठोकर मार दी ।

  • 2013 मे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मे खींवसर विधानसभा सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा को 24600 वोटों से हराकर दुसरी बार खिंवसर के विधायक बने।

  • 07 दिसम्बर 2017 को प्रदेश के किसानों  व जवानों  के विभिन्न मुद्दों को लेकर नागौर में एतिहासिक किसान हूंकार महारैली का आयोजन  किया।   

 

हनुमान जी बेनीवाल की राजनेतिक उपलब्धियां  :-

राजस्थान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रहते हुए आपने गांव ढाणी से आने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों कि पिडा़ को समझते हुए प्रदेश के सबसे बड़े विश्व विद्यालय में ग्रामीण विद्यार्थियों के एडमिशन के लिए  5% अतिरीक्त अंको की व्यवस्था की। जिससे राजस्थान विश्वविद्यालय में 8 हजार छात्र छात्राओं​ के एडमिशन ज्यादा हो गए ओर तत्कालीन भैरो सिंह शेखावत की सरकार के 58 विधायको ने सदन में राजस्थान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष की गिरफ्तारी की मांग की।
2003 मे मुंडवा विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मे चुनाव लड़ा मगर 2000 वोटों से हार गए। इस चुनाव में हनुमान जी बेनीवाल के सामने उस समय भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज जाट नेता विजय भाई साहब उर्फ विजय पूनीया कि पत्नी श्रीमती उषा पूनीया ने चुनाव लडा़ था। जिनका चुनाव प्रचार के लिए प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र जी देओल स्वयं पधारे थे। ऐसे भीषण चुनावी​ रण में भी आप मात्र 2000 मतों से हारें।
2008 मे बीजेपी के टिकट पर नवगठित खींवसर विधानसभा से चुनाव लड़ा और नागौर जिले की सभी सीटो मे सबसे बड़ी जीत दर्ज की।
और वसुंधरा के इस कार्यकाल से प्रदेश की वसुंधरा सरकार से प्रदेश के किसान व जवान भ्रष्टाचार, सरकार की दोगली सामंतवादि नीतियों​ से त्रस्त​ हो गये। सत्ता पक्ष का विधायक होने के नाते आपने प्रदेश के किसान व जवान की तकलीफ को समझा और तत्कालीन वसुंधरा सरकार के विधायक दल की बैठक में भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देते हुए कहा कि ” जिस सरकार में प्रदेश के किसान व जवान सरकार की नीतियों के कारण त्रस्त होकर करहा रहे हो उस सांमतवादी सरकार का हिस्सा बन कर मैं नहीं रह सकता ” ओर इसी के साथ अपने भारतीय जनता पार्टी से अपना नाता तोड़ लिया। और अकेले ही निकल पड़े राजस्थान के किसान व जवान के दु:ख दर्द को दूर करने के लिए।
और इस घटना के साथ यहां पर आपके राजनैतिक सफर का एक अध्याय समाप्त हो जाता है और एक नये राजनैतिक सफर के रूप में आपने अकेले ही प्रदेश के किसान व जवान का बिडा़ उठाया।
इसके बाद आगामी 2013 के विधानसभा चुनाव में आपने पुनः निर्दलीय उम्मीदवार के रूप मे खींवसर विधानसभा सीट से​ चुनाव लडा़ ओर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के दुर्गसिंह चौहान को 24600 वोटों से हराकर दुसरी बार खिंवसर के विधायक बने। इस विधानसभा चुनाव में भी आपकी जीत बहुत अहम थी।
2014 के लोकसभा चुनाव में नागौर लोक सभा सीट से आपने निर्दलीय उमीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।  इस चुनाव में आपका मकसद नागौर लोक सभा सीट पर बढ़ते भाई भतीजा वाद को रोकना था, और आपने ये काम बखूबी कर दिया।  इस चुनाव में आपको नागौर की जनता ने 2 लाख वोट दिए।
07 दिसंबर 2016 को आपने नागौर जिला मुख्यालय पर किसान हुंकार महारैली का आयोजन किया। जिसमें सम्पूर्ण राजस्थान के 5 लाख किसानों व जवानों ने हिस्सा लिया। किसान हुंकार महारैली अब तक की राजस्थान की सबसे बड़ी रैलीयो में से एक हैं। इस महारैली में आपने किसानों व जवानों से संबंधित 52 सुत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें किसानों का कर्ज माफी, किसानों को मुफ्त बिजली, राजस्थान में शराबबंदी, टोल मुक्त राजस्थान आदि अनेक जन हितकारी मुद्दे सम्मिलित थे।
26 अप्रेल 2017 को 14 वीं विधानसभा के बजट भाषण पर चर्चा के दौरान किसानों​ को सस्ती बिजली दिलाने व किसानो के कर्ज माफ़ी के मुद्दों को लेकर आपने विधान सभा की वैल में धरना दे दिया।  इस पर सरकार ने तानाशाही और सामंतवादी रवैया आपनाते हुए आपको विधान सभा से एक वर्ष के लिए निलम्बित कर दिया।  सरकार के इस फैसले से राजस्थान के 192 जिला व तहसील मुख्यालयों पर भारी धरना व प्रदर्शन किया गया।  तथा 30 जून को जयपुर में 50 हजार बेनीवाल समर्थकों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को वसुंधरा सरकार ने दबाने की भरपुर कोशिश की मगर बेनीवाल समर्थकों के आगे सरकार की एक नहीं चली।

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खिंवसर विधायक हनुमान बेनीवाल आज राजस्थान प्रदेश के सर्वमान्य नेता बन चुके हैं । विधायक बेनीवाल राजस्थान में जाट को मुख्यमंत्री बनाने का मिशन लेकर चल रहे हैं और प्रदेश भर में अपने भारी काफिले के साथ जगह जगह बड़ी बड़ी सभायें करके जनसमुदाय को जाट सीएम बनाने के लिए संकल्पबद्ध करवा रहे हैं । बेनीवाल के लगातार चल रहे इन तूफानी दौरों ने दोनों पार्टियो को चिंता में डाल दिया हैं । साथ ही साथ बेनीवाल तीसरे मोर्चे को राजस्थान में प्रभावी रूप से स्थापित करने की बात कह रहे हैं ।

आज राजस्थान ही नहीं अपितु पुरे देश में आपको किसान कौम के सच्चे साथी, एवं हक के लिये लडने वाले, अन्याय के खिलाफ अपनी दंबग आवाज एवं निडरता से झंडा गाडने वाले से जाना जाता है । आपकी इसी विशेषता के कारण आज आप राजस्थान प्रदेश के युवाओं की पहली पंसद बन चुके हो, एवं आपकी लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढती जा रही है ।। आपकी बढती लोकप्रियता से जलकर कुछ समाज कंटको ने गत 23 सितम्बर को आप पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया, पर ईशवर की कृपा से सकुशल बच गये । आपकी लोकप्रियता एवं दिल में बसने वाली छवि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आप पर हुऐ हमले के विरोध में समुचे राजस्थान में 200 से अधिक जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुऐ, राजस्थान यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हुआ, पुलिस ने निर्दोष युवाओं पर लाठियां बरसाई जिससे 87 युवा घायल हुऐ, आज भी जयपुर के थानों में आपके प्रशंसक बंद है । इसके अलावा भी अनेकों बातें है जिनको लिखते लिखते शायद बरस गुजर जाये । अंत में इतना ही कहना चाहुंगा आप जैसा नेता आज तक इस प्रदेश में नहीं हुआ, राजस्थान की जनता को आपसे बहुत आस-उम्मीद है, ईशवर आपको सकुशल रखें।