घोषणा के बावजुद समर्थन मूल्य पर खरीद का शुरू नही होना सरकारी तंत्र की विफलता – बेनीवाल

राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करने के बावजूद मंडियों में खरीद शुरू नही होना सरकारी तंत्र की विफलता है ! राज्य सरकार किसानों को खरीद के टोकन ऑनलाइन जारी करने का ऐसा फंडा अपनाया जिससे नुकसान का खामियाजा कही ना कही अन्नदाता को ही उठाना पड़ेगा क्योंकि अभी तक अधिकतर गांवो में गिरदावरी भी नही हुई और आधार कार्ड होने के बावजूद खरीद के टोकन जारी करने में भामाशाह कार्ड की अनिवार्यता डालना भी गलत है क्योंकि कई परिवारों के कार्ड अभी बने नही है ऐसे में कई किसान परिवारों को मजबूरन बिचौलियों को अपनी उपज बैचनी पड़ेगी।

 


पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा की गई खरीद सरकार को सारे खर्चे जोड़कर लगभग 6400 रुपये प्रति क्विटल से अधिक पड़ी और सरकार ने उन मुंगो को 4100 रुपये प्रति किवंटल के आस पास व्यापारियों को नीलाम किया और वो भी ऐसे समय जब किसानों की फसल पक कर तैयार हो गई जिसकी वजह से अगर कोई किसान सरकार के अधिकृत सेंटर पर किसी कारण से मूंग नही बेच पाता है तो, उसको मंडी में वो मूल्य नही मिल पायेगा जो मिलना चाहिये और वो व्यापारी अब सरकार से खरीद किया गया मूंग वापिस समर्थन मूल्य पर सरकार को ही बेचेंगे ऐसे में आम किसान तो ठगा का ठगा ही रह गया। नागौर जिले में 5 स्थानों पर नेफेड द्वारा तथा 2 स्थानो पर एफसीआई द्वारा विगत वर्ष 640308.76 किवंटल मूंग की खरीद हुई जिसके एवज में सरकार ने 33814.33 लाख का भुगतान किसानों को महीनों देरी के बाद किया वही जिस मूल्य पर सरकार ने वापिस मूंग नीलाम किये उसके अनुसार 1 अरब 53 करोड़ 72 लाख 21 हजार 24 रुपये का राजस्व नुकसान सरकार को हुआ जिसका फायदा अधिकारियों और बिचौलियों ने उठाया। यह आंकड़े सिर्फ नागौर के है अगर पूरे प्रदेश स्तर पर खरीद के बाद नीलामी के आंकड़ों पर गौर करे तो खरबो का नुकसान सरकार हुआ इसलिये सरकार यदि कारगर नीति बनाती तो सीधा लाभ किसानों को अंतरित किया जा सकता था मगर किसानों को जारी टोकन के 65 प्रतिशत भी सरकार खरीद नही कर पाई और मजबूरी में कम दाम पर किसानों को मूंग बिचौलियों को बेचना पड़ा।

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