कुछ इस तरह से सफल होगा हनुमान जी बेनीवाल का मिशन 2018

     “सोये हो अब भी तो जगने में कोई सार नहीं है।

     कर लिये निश्चित ईरादे तो मिलती हार नहीं है।”

 

कुछ इस तरह से सफल होगा हनुमान जी बेनीवाल का मिशन 2018

2018 की चुनावी बिसात अप्रत्यक्ष रूप से बिछने लगी है। बीजेपी मोदी की लूंगी पकड़ के चुनाव लड़ेगी तो कांग्रेस नोटबंदी और भ्रष्टाचार की बेसुरी पुंगी बजाकर।

इन पार्टियों को और इनके कट्टर जाट समर्थकों को एक साईड रख कर कुछ अपनी बात करते हैं। क्योंकि बीजेपी व कांग्रेस के मुख्यमंत्री उम्मीदवार लगभग तय है और वहां जाटों की वेटिंग लिस्ट 2050 तक नहीं आनी। दूसरा इन दोनों पार्टियों के कट्टर जाट समर्थकों से उलझना वक्त बर्बाद करना है, क्योंकि जो 20-25 सालों से फैसला नहीं कर पाये वो 2 साल में अपनी बुद्धि विकसित नहीं कर पायेंगे।

बात करते है किसान सत्ता 2018 की। 2018 में किसानों की उम्मीद हनुमान बेनिवाल व किरोड़ी लाल मीणा की तरफ दिख रही है।

मान लिजीए ये दोनों ही किसी पार्टी को समर्थन दे दे मगर इतना तय है कि ये दोनों किसानों का स्वाभिमान सर्वोपरी रख कर ही कोई फैसला लेंगे। जिस भी सरकार को यह समर्थन देंगे वहां किसानों की आवाज पहले सुनी जायेगी।

मगर यह बाद की बात है। क्योंकि फिलहाल ऐसा कतई नहीं लग रहा कि हमें किसी पार्टी को समर्थन देने की जरूरत पड़ेगी। जिस तरह उत्तर, पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान के जवानों और किसानों ने बेनिवाल को अपना नेता मानकर परिवर्तन का संकेत दिया है उससे तो यही लग रहा है कि इस बार राजस्थान की राजनीति में धमाका तय है। प्रदेश की जनता को दिवास्वप्न दिखा कर जिस तरह से इन दोनों पार्टियों ने लूटा है, इन्हें सबक सीखाना जरूरी हो गया है।

गहलोत ने कार्यकाल के अंतिम साल में बंपर भर्तियां निकाली मगर सब की सब कोर्ट में अटकी पड़ी है। वसुंधरा ने नाममात्र की भर्ती निकाली वो भी कोर्ट के पचड़े में पड़ी सड़ रही है। बेरोजगारों को आर्थिक व मानसिक विषाद देने में इन सरकारों ने कोई कसर नहीं छौड़ी।

 

किसानों के साथ बद बदतर व्यवहार किया जा रहा है। विजीलेंस के नाम पर बदसलूकी और लूट के रोज अखबारों में काले चिट्ठे छपते हैं। पर अफसोस इस बात का होता है कि पार्टियों के पीट्ठू अपना जमीर बेचके इन भ्रष्टाचारियों की चप्पले उठाने में लगे हैं।

हमारे समाज में एकता लाने के लिए लोग मर खप गये मगर ये भेड़चाल है कि खत्म होने का नाम नहीं लेती। बीजेपी से निकलकर कांग्रेस में घुस गये तो कांग्रेस से निकलकर बीजेपी की जी हजूरी में लग गये।

क्या जो जाट विधायक बिना पार्टी सिंबल से जीत के विधानसभा जाते हैं वो देवता हैं? नहीं वे भी तुम्हारी तरह इंसान हे मगर फर्क बस ईतना है कि वे जननेता है और तुम महज नेता। जो कुर्ते की सलवटों को मुड़ने भी नहीं देते मगर जननेताओं के कुर्ते पसीने से लथपथ रहते हैं। जननेता को जी हजूरी की जरूरत नहीं रहती और तुम नेताओं को पार्टी की थाली बिना शाम का खाना भी नसीब नहीं होता।

अभी बीजेपी कांग्रेस के कुछ छुटभैया जाट नेता टिकट की बंदरबांट तक अखबारों व सोशल मीडिया में दिग्गज नेताओं के साथ फोटो डालने में लगे हुए दिखाई देते रहेंगे। इसलिए इनको अभी इनके मन की कर लेने दो। टिकट नहीं मिली तो ये अपना सिर धुनते हुए हमारी तरफ ही आयेंगे।

सत्ता परिवर्तन की तथा किसान राज लाने की तमन्ना दिल में रखने वाले साथियों अब हमें चेतना होगा। मुद्दों की हमारे पास कमी नहीं है। सरकारों द्वारा की गई उपेक्षाओं को गांव गांव ढाणी ढाणी के लोगों को बतानी होगी। हर किसान को बताना होगा कि हमारा भाई हनुमान बेनिवाल अकेला 160 नेताओं से रोज विधानसभा में लड़ रहा है। सिर्फ हमारे लिए। ताकि हमें हमारा स्वाभिमान दिला सके। हमें राज दे सके। किसानों के फैसले खुद किसान ले ऐसी सरकार बना सके। मगर यह सब कुछ केवल बातों से संभव नहीं है। इसके लिए हमें भी आशावादी बनना पड़ेगा। हमें यह दृढनिश्चय करना पड़ेगा कि हमारी सरकार बनेगी और निश्चित ही बनेगी। क्योंकि साथियों बिना स्वप्न देखे स्वप्न पूरे करने की जिद भी नहीं पैदा होती।

कई भाईयों के मन में यह भ्रम हे कि अभी तक पार्टी की घौषणा भी नहीं हुई और ना ही विधानसभा वार कंडीडेट तय हुए हैं। तो भाईयों पार्टी की घौषणा जल्द होने वाली है। रही बात कंडीडेट की तो इसका फैसला बेनिवाल जी आप सभी से विचार विमर्श करके ही करेंगे। जब तक ये काम नहीं हो जाते हमें तीसरे मौर्चे का जमीनी आधार बनाने का काम जारी रखना है। किसान जातियों को एकजुट रखने का काम संयम के साथ करना है। कई बार युवा साथी जोश में आपस में बैर पाल लेते हैं। ऐसी छोटी छोटी बातों पर लड़ना कभी ना कभी हमारी ही राह में कांटा बनकर चुभेगा। हम हमारी पार्टी का प्रचार कर रहे हैं दूसरे अपनी का। मगर हमारे पास स्वच्छ मुद्दे मौजूद हैं उन मुद्दों का आईना दोनों पार्टियों के समर्थकों को दिखाओ।

साथियों जाट आरक्षण पाना, 2018 राजस्थान व 2019 हरियाणा में बीजेपी को सबक सिखाना अब हमारे स्वाभिमान की बात बन गई है। इस स्वाभिमान को जिंदा रखने की तैयारी में जुट जाओ। मुश्किल जरूर है मगर नामुमकिन कुछ भी नहीं। जिस दिन इस स्वाभिमान को जिंदा रखने का जुनून सर पर सवार कर लिया उस दिन हमारी एकता के भीषण प्रहार से ये सरकारें पानी मांगती नजर आयेगी। परिवर्तन सामने हैं मगर राहें हमें चुननी है। 13 दिसंबर 2018 को हम किसानों का झंडा विधानसभा में लहरायेगा। वीर तेजाजी के जयकारों से विधानसभा गुंजेगी। यह हमारा सपना है और यह सपना हमने खुली आंखो से देखा है क्योंकि हम सपने सच करने की हिम्मत रखते हैं। क्योंकि हम किसान है, क्योंकि हम युवा हैं, क्योंकि हम हनुमान बेनिवाल है।

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